Wednesday, June 24, 2026
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गंगा दशहरा 2025: तिथि, पूजा विधि, दान और ज्योतिषीय प्रभाव

हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व है। यह पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। भक्तजन मां गंगा की आरती कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं गंगा दशहरा 2025 की तिथि, पूजा का सही तरीका और शुभ मुहूर्त से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ।

इस गंगा दशहरा पर तीर्थ यात्रा और पूजन के दौरान अपने ठहरने की सुविधा YatraDham.Org से पहले ही बुक करें और अपनी यात्रा को सुखद व शांतिमय बनाएं।

गंगा दशहरा कब और क्यों मनाया जाता है?

गंगा दशहरा हर वर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। गंगा दशहरा गीत गंगा माता की महिमा और इस पावन पर्व पर उनकी आरती, भक्ति एवं स्नान की पुण्यपरंपरा को सुंदर रूप में प्रस्तुत करता है।

गंगा दशहरा कहां मनाया जाता है?

गंगा दशहरा भारत के अनेक हिस्सों में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, विशेषकर उन स्थानों पर जो गंगा नदी के किनारे बसे हैं। यह पर्व गंगा मैया के धरती पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। नीचे बताए गए प्रमुख स्थलों पर यह पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है:

प्रमुख स्थान

स्थानविशेषता
हरिद्वार (उत्तराखंड)हर की पौड़ी पर विशाल गंगा आरती, श्रद्धालुओं का गंगा स्नान
ऋषिकेश (उत्तराखंड)त्रिवेणी घाट पर विशेष पूजा और गंगा आरती
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)संगम स्थल पर लाखों श्रद्धालुओं द्वारा स्नान और दान
गंगोत्री (उत्तराखंड)गंगा का उद्गम स्थल, विशेष पूजन और गंगाजल का महत्व
कानपुर, फर्रुखाबाद, मिर्जापुर आदिगंगा तटों पर स्थानीय स्तर पर पूजा और दान
पटना (बिहार)गंगा घाटों पर विशेष पूजा और भजन संध्या
कोलकाता (पश्चिम बंगाल)हुगली नदी (गंगा की शाखा) के घाटों पर पूजन और धार्मिक आयोजन

क्यों इन स्थानों पर विशेष होता है गंगा दशहरा?

  • गंगा नदी की महत्ता के कारण इन स्थलों पर लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं।
  • गंगा स्नान, दान और गंगा आरती का विशेष पुण्यफल माना गया है।
  • कई स्थानों पर मेले, कथा, भजन-कीर्तन और दीपदान के कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

यदि आप किसी विशेष तीर्थ स्थान की पूजा विधि जानना चाहते हैं या यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो YatraDham.Org पर जाएं – जहाँ आपको धर्मशालाओं और तीर्थस्थलों के पास ठहरने की सुविधा सरलता से उपलब्ध होती है।


Ganga Dussehra 2025 Video

Ganga Dussehra 2025 – Celebrate the holy day of Maa Ganga with love and devotion.


गंगा दशहरा महोत्सव के दौरान ठहरने के स्थान

गंगा दशहरा महोत्सव के दौरान ठहरने के लिए उत्तम स्थान उपलब्ध हैं, जिन्हें आप ऑनलाइन YatraDham.Org के माध्यम से बुक कर सकते हैं।

गंगा दशहरा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

गंगा दशहरा 2025 में गुरुवार, 5 जून को मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है।

विवरणदिनांकसमय
दशमी तिथि प्रारंभ4 जून 2025 (बुधवार)रात 11:54 बजे
पर्व तिथि (गंगा दशहरा)5 जून 2025 (गुरुवार)पूरे दिन
हस्त नक्षत्र प्रारंभ5 जून 2025 (गुरुवार)सुबह 3:35 बजे
व्यतीपात योग प्रारंभ5 जून 2025 (गुरुवार)सुबह 9:14 बजे
हस्त नक्षत्र समाप्त6 जून 2025 (शुक्रवार)सुबह 6:34 बजे
व्यतीपात योग समाप्त6 जून 2025 (शुक्रवार)सुबह 10:13 बजे
दशमी तिथि समाप्त6 जून 2025 (शुक्रवार)सुबह 2:15 बजे

गंगा दशहरा पूजा

गंगा दशहरा के दिन की गई पूजा अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन माँ गंगा की पूजा और गंगा स्नान से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहाँ गंगा दशहरा की पूजा विधि एक ही पैराग्राफ में दी गई है:

गंगा दशहरा के दिन प्रातः स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और माँ गंगा की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक, धूप, फूल, अक्षत, तुलसी पत्र और गंगाजल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ गंगे नमः” मंत्र का जाप करें। गंगा माता को सत्तू, मौसमी फल, शरबत, दूध और जल का नैवेद्य अर्पित करें। गंगा आरती करें और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान दें।

यदि संभव हो तो गंगा नदी में जाकर स्नान करें या घर पर रखे गंगाजल से स्नान कर श्रद्धा पूर्वक गंगा माता का ध्यान करें। इस दिन दस प्रकार के दान विशेष फलदायी माने जाते हैं – जैसे अन्न, जल, फल, वस्त्र, छाता, जूते, पंखा, शरबत, सत्तू और दक्षिणा।

इस पूजा विधि को श्रद्धा से करने पर जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

Ganga Dussehra 2025 Puja
  • गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर आप अपनी पूजा की बुकिंग YatraDham.Org के माध्यम से आसानी से कर सकते हैं।

गंगा दशहरा 2025 व्रत और पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान और संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा नदी में स्नान करें या गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के पश्चात व्रत का संकल्प लें:
  • “मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीगंगादशहरा व्रतमहं करिष्ये”
  • गंगा मां की स्थापना: स्वच्छ स्थान पर मां गंगा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और दीपक, फूल, धूप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
  • मंत्र जाप: निम्न मंत्रों का 108 बार जाप करें:
  • “ॐ नमः शिवाय गंगायै नमः”
  • “ॐ गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति नर्मदे सिंधु कावेरी जलस्मिन्सन्निधिं कुरु”
  • व्रत और दान: दिन भर फलाहार या जल का सेवन करें। रात्रि में मां गंगा की आरती करें और अगले दिन व्रत का पारण करें। गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन और गरीबों की सहायता करें।
Ganga Dushera 2025

गंगा दशहरा पर क्या दान करें और क्या नहीं

गंगा दशहरा पर दान-पुण्य का बहुत अधिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। नीचे बताया गया है कि इस दिन क्या दान करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए:

गंगा दशहरा पर क्या दान करें:

वस्तुकारण / लाभ
जल से भरे कलशशीतलता और जीवन का प्रतीक, पवित्रता की भावना
सफेद वस्त्रशांति और सात्विकता का प्रतीक
चावल और घीभोजन और ऊर्जा का प्रतीक
शहद और चीनीमिठास और मधुरता का दान
पंखा / मटका / छातागर्मी से राहत देने वाली वस्तुएँ – मौसमानुसार पुण्यकारी
गाय को हरा चारागौ सेवा का महत्व – पुण्यदायी
तांबे / पीतल के पात्रधार्मिक दृष्टि से शुभ और उपयोगी
गंगाजलश्रद्धा से दान किया गया गंगाजल अत्यंत फलदायक माना जाता है

गंगा दशहरा पर क्या दान नहीं करें:

वस्तुकारण
काले रंग की वस्तुएँअशुभता का प्रतीक मानी जाती हैं
मांस-मदिरावर्जित और अधार्मिक कर्म
पुरानी या फटी हुई वस्तुएँदान में साफ, उपयोगी और सम्मानजनक वस्तुएँ ही दें
नकारात्मक भाव से किया गया दानकेवल दिखावे या अहंकार से किया गया दान फलहीन होता है

गंगा दशहरा का महत्व

गंगा दशहरा हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पावन और पुण्यदायी पर्व है, जिसे माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और गंगा आरती का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है, इसलिए इसे “दशहरा” कहा जाता है।

गंगा जल को मोक्षदायिनी माना गया है, और इस दिन श्रद्धा पूर्वक गंगा माता की पूजा करने से आत्मिक शुद्धि, पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण शुद्धि का संदेश भी देता है।

गंगा दशहरा 2025 एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है, जो आत्मिक शुद्धि, पापों के नाश और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। इस दिन गंगा स्नान, विधिपूर्वक पूजा और दान-पुण्य करके मां गंगा की कृपा प्राप्त की जा सकती है।


FAQs

1. गंगा दशहरा 2025 में कब मनाया जाएगा?

गंगा दशहरा 2025 में गुरुवार, 5 जून को मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है।

2. गंगा दशहरा 2025 के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?

दशमी तिथि का प्रारंभ 4 जून को रात 11:54 बजे होगा और समापन 6 जून को रात 2:15 बजे होगा। हस्त नक्षत्र 5 जून को सुबह 3:35 बजे से प्रारंभ होकर 6 जून को सुबह 6:34 बजे तक रहेगा।

3. गंगा दशहरा पर स्नान और दान का क्या महत्व है?

गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, पंखा, और तिल का दान करना पुण्यकारी होता है।

4. गंगा दशहरा का नाम ‘दशहरा’ क्यों है?

‘गंगा दशहरा’ में ‘दश’ का अर्थ है दस और ‘हारा’ का अर्थ है नाश। इस दिन गंगा स्नान और पूजा से दस प्रकार के पापों का नाश होता है, इसलिए इसे ‘गंगा दशहरा’ कहा जाता है।

5. गंगा दशहरा के अवसर पर कौन-कौन से प्रमुख स्थानों पर उत्सव होते हैं?

हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज, ऋषिकेश, पटना और गढ़मुक्तेश्वर जैसे स्थानों पर गंगा दशहरा बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जहाँ हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा में भाग लेते हैं।


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Sanjay Dangrocha
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